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चम्बा , 2 फरवरी [ शिवानी ] ! विधायक नीरज नैय्यर ने केंद्रीय बजट 2026-27 को हिमाचल प्रदेश के हितों के विपरीत बताते हुए कहा कि बजट में प्रदेश की आम जनता, किसानों- बागवानों, युवाओं की अपेक्षाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा है कि बजट में हिमाचल के साथ अन्याय किया गया है और पहाड़ी राज्यों की विशेष भौगोलिक व आर्थिक परिस्थितियों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा है कि गत वर्षो से भारी प्राकृतिक आपदाओं- वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ से प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, फिर भी केंद्र सरकार ने बजट में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं रखा। विधायक ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए भी बजट में पहाड़ी राज्यों को कोई ठोस सहायता नहीं दी गई है। नीरज नैय्यर ने साथ में यह भी कहा है कि केंद्रीय सरकार द्वारा प्रदेश के राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान हिमाचल जैसे छोटे और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए अत्यंत आवश्यक था। इसे बंद करना राज्य की वित्तीय स्थिति को और कमजोर करेगा तथा विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। विधायक ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह बजट प्रावधानों पर पुनर्विचार करे और हिमाचल प्रदेश को उसकी वास्तविक आवश्यकताओं व संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप न्यायसंगत बजटीय सहयोग प्रदान करें।
चम्बा , 2 फरवरी [ शिवानी ] ! विधायक नीरज नैय्यर ने केंद्रीय बजट 2026-27 को हिमाचल प्रदेश के हितों के विपरीत बताते हुए कहा कि बजट में प्रदेश की आम जनता, किसानों- बागवानों, युवाओं की अपेक्षाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा है कि बजट में हिमाचल के साथ अन्याय किया गया है और पहाड़ी राज्यों की विशेष भौगोलिक व आर्थिक परिस्थितियों की पूरी तरह अनदेखी की गई है।
उन्होंने कहा है कि गत वर्षो से भारी प्राकृतिक आपदाओं- वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ से प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, फिर भी केंद्र सरकार ने बजट में आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं रखा। विधायक ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए भी बजट में पहाड़ी राज्यों को कोई ठोस सहायता नहीं दी गई है।
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नीरज नैय्यर ने साथ में यह भी कहा है कि केंद्रीय सरकार द्वारा प्रदेश के राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त करना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान हिमाचल जैसे छोटे और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए अत्यंत आवश्यक था। इसे बंद करना राज्य की वित्तीय स्थिति को और कमजोर करेगा तथा विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।
विधायक ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह बजट प्रावधानों पर पुनर्विचार करे और हिमाचल प्रदेश को उसकी वास्तविक आवश्यकताओं व संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप न्यायसंगत बजटीय सहयोग प्रदान करें।
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