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शिमला , 06 मार्च [ विशाल सूद ] ! भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मंदिरों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक “हिमाचल के मंदिर” प्रकाशित की गई है जिसका विमोचन आज उपमुख्यमंत्री, मुकेश अग्निहोत्री के कर कमलों से किया गया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने इस प्रकाशन को प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है और यहां की लोक संस्कृति देव आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है। प्रदेश के लगभग प्रत्येक गांव में किसी न किसी देवता का वास माना जाता है, जिससे यहां की देव संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की समृद्ध झलक देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ देश-विदेश में हिमाचल की देव संस्कृति को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रकाशित इस कॉफी टेबल बुक में हिमाचल प्रदेश के 51 प्रमुख मंदिरों के इतिहास, उनके आकर्षक छायाचित्र, हर जिले के मानचित्र, मानचित्र में मंदिरों की अनुमानित स्थिति को दर्शाया गया है। इसमें जिला बिलासपुर के श्री नैना देवी, चंबा के श्री लक्ष्मी नारायण, चामुंडा मंदिर, हमीरपुर के बाबा बालक नाथ, कांगड़ा के श्री ज्वाला जी, किन्नौर के उखा माता, कुल्लू के हिडिंबा माता, बिजली महादेव, लाहौल-स्पीति के मुकुला देवी, त्रिलोकी नाथ, मंडी के पंचवक्त्र, पराशर ऋषि, शिमला के भीमा काली, तारा देवी, सिरमौर के रेणुका माता, महामाया बाला सुंदरी, सोलन का शूलिनी माता और ऊना के चिंतपूर्णी मंदिर सहित 51 मंदिरों को सम्मिलित किया गया है। यह पुस्तक प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रमुख मंदिरों की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक जानकारी को संजोए हुए है, जो शोधार्थियों, पर्यटकों, संस्कृति प्रेमियों तथा श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थान एवं पूर्त्ति विन्यास अधिनियम, 1984 के अंतर्गत प्रदेश के 36 मंदिर राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित किए जा चुके हैं, जिनका प्रबंधन मंदिर न्यासों के माध्यम से किया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य मंदिरों के संरक्षण एवं रखरखाव के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर सहायता अनुदान भी प्रदान किया जाता है। इस अवसर पर आशा कुमारी, पूर्व शिक्षा मंत्री, नीरज नैय्यर, विधायक, सदर चंबा, सचिव (भाषा एवं संस्कृति) राकेश कंवर (भा.प्र.से.), भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक सीमा कश्यप (भा.प्र.से.), संयुक्त निदेशक मनु गुप्ता (हि.प्र.से.), ओ. एस. डी. माननीय उप मुख्यमंत्री, धनबीर ठाकुर तथा विभाग के सहायक निदेशक सुरेश राणा व सुश्री सुनीला ठाकुर भी उपस्थित रहे।
शिमला , 06 मार्च [ विशाल सूद ] ! भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मंदिरों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक “हिमाचल के मंदिर” प्रकाशित की गई है जिसका विमोचन आज उपमुख्यमंत्री, मुकेश अग्निहोत्री के कर कमलों से किया गया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने इस प्रकाशन को प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति को देश-विदेश तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है और यहां की लोक संस्कृति देव आस्था से गहराई से जुड़ी हुई है। प्रदेश के लगभग प्रत्येक गांव में किसी न किसी देवता का वास माना जाता है, जिससे यहां की देव संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की समृद्ध झलक देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ देश-विदेश में हिमाचल की देव संस्कृति को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा प्रकाशित इस कॉफी टेबल बुक में हिमाचल प्रदेश के 51 प्रमुख मंदिरों के इतिहास, उनके आकर्षक छायाचित्र, हर जिले के मानचित्र, मानचित्र में मंदिरों की अनुमानित स्थिति को दर्शाया गया है। इसमें जिला बिलासपुर के श्री नैना देवी, चंबा के श्री लक्ष्मी नारायण, चामुंडा मंदिर, हमीरपुर के बाबा बालक नाथ, कांगड़ा के श्री ज्वाला जी, किन्नौर के उखा माता, कुल्लू के हिडिंबा माता, बिजली महादेव, लाहौल-स्पीति के मुकुला देवी, त्रिलोकी नाथ, मंडी के पंचवक्त्र, पराशर ऋषि, शिमला के भीमा काली, तारा देवी, सिरमौर के रेणुका माता, महामाया बाला सुंदरी, सोलन का शूलिनी माता और ऊना के चिंतपूर्णी मंदिर सहित 51 मंदिरों को सम्मिलित किया गया है।
यह पुस्तक प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रमुख मंदिरों की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक जानकारी को संजोए हुए है, जो शोधार्थियों, पर्यटकों, संस्कृति प्रेमियों तथा श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थान एवं पूर्त्ति विन्यास अधिनियम, 1984 के अंतर्गत प्रदेश के 36 मंदिर राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित किए जा चुके हैं, जिनका प्रबंधन मंदिर न्यासों के माध्यम से किया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य मंदिरों के संरक्षण एवं रखरखाव के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर सहायता अनुदान भी प्रदान किया जाता है।
इस अवसर पर आशा कुमारी, पूर्व शिक्षा मंत्री, नीरज नैय्यर, विधायक, सदर चंबा, सचिव (भाषा एवं संस्कृति) राकेश कंवर (भा.प्र.से.), भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक सीमा कश्यप (भा.प्र.से.), संयुक्त निदेशक मनु गुप्ता (हि.प्र.से.), ओ. एस. डी. माननीय उप मुख्यमंत्री, धनबीर ठाकुर तथा विभाग के सहायक निदेशक सुरेश राणा व सुश्री सुनीला ठाकुर भी उपस्थित रहे।
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