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चम्बा , 02 फरवरी [ शिवानी ] ! भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई इकाई चम्बा ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए हालिया बजट में हिमाचल प्रदेश की कथित उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज एनएसयूआई जिला अध्यक्ष मुकेश शर्मा की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने एडीसी अमित मैहरा के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है। मुकेश ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाला पहाड़ी राज्य है, जहां विकास कार्यों की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक होती है। इसके बावजूद, केंद्रीय बजट में प्रदेश के हितों के साथ गंभीर अन्याय किया गया है। मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि बजट में न तो हिमाचल को उसका उचित वित्तीय हिस्सा दिया गया और न ही आपदा प्रभावित राज्य होने के नाते किसी विशेष आर्थिक पैकेज या वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश को उसका उचित वित्तीय हक दिलाया जाए। आपदा प्रभावित राज्य के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए। मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे के लिए आवंटित बजट में तत्काल बढ़ोतरी की जाए। रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को समाप्त न किया जाए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष मांग उठाई है कि केंद्र सरकार को अपनी हिमाचल विरोधी बजट नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए निर्देशित किया जाए। मुकेश शर्मा ने कहा कि युवाओं और आम जनता से जुड़ी योजनाओं में अपेक्षित वृद्धि न होना राज्य के साथ स्पष्ट भेदभाव है।
चम्बा , 02 फरवरी [ शिवानी ] ! भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन एनएसयूआई इकाई चम्बा ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए हालिया बजट में हिमाचल प्रदेश की कथित उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज एनएसयूआई जिला अध्यक्ष मुकेश शर्मा की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने एडीसी अमित मैहरा के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा है।
मुकेश ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाला पहाड़ी राज्य है, जहां विकास कार्यों की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक होती है। इसके बावजूद, केंद्रीय बजट में प्रदेश के हितों के साथ गंभीर अन्याय किया गया है। मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि बजट में न तो हिमाचल को उसका उचित वित्तीय हिस्सा दिया गया और न ही आपदा प्रभावित राज्य होने के नाते किसी विशेष आर्थिक पैकेज या वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया।
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उन्होंने मांग करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश को उसका उचित वित्तीय हक दिलाया जाए। आपदा प्रभावित राज्य के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए। मनरेगा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे के लिए आवंटित बजट में तत्काल बढ़ोतरी की जाए।
रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को समाप्त न किया जाए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष मांग उठाई है कि केंद्र सरकार को अपनी हिमाचल विरोधी बजट नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए निर्देशित किया जाए। मुकेश शर्मा ने कहा कि युवाओं और आम जनता से जुड़ी योजनाओं में अपेक्षित वृद्धि न होना राज्य के साथ स्पष्ट भेदभाव है।
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