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शिमला , 03 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! एफटीए के खिलाफ कुलदीप राठौर ने केंद्र पर साधा निशाना, अनुशासनहीन नेताओं को दी सख्त चेतावनीएंकर : कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने एक साथ दो मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए राजनीति और संगठन के भीतर हलचल पैदा कर दी है। एक ओर उन्होंने एफटीए घेरा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस में 'अनुशासन का डंडा' चलाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।राठौर ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही अनुशासन समिति की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा होगी और अनुशासन तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गाज गिर सकती है। कुलदीप राठौर ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित FTA के तहत सेब पर आयात शुल्क (Import Duty) घटाने की मांग का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार बताया। राठौर ने कहा कि अमेरिका द्वारा शून्य टैरिफ की मांग भारतीय किसानों के लिए घातक है। सस्ता विदेशी सेब बाजार में आने से स्थानीय बागवानों की कमर टूट जाएगी। उन्होंने हिमाचल विधानसभा में पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से भी इसी तरह के प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। उन्होंने पंजाब द्वारा इस दिशा में की गई पहल की सराहना की। उन्होंने बागवानों के हितों की रक्षा के लिए 'किसान आयोग' के गठन की वकालत की और स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों में देश के अन्नदाता की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं कुलदीप राठौर ने हिमाचल कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष के पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता बरतने वाले नेताओं और पदाधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी है।उन्होंने कहा कि कोई भी विधायक या बड़ा नेता संगठन के कार्यों में अनावश्यक दखल नहीं देगा। पार्टी मंच के बाहर सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत राय रखना या पार्टी विरोधी बयानबाजी करना अब भारी पड़ेगा। राठौर ने दो टूक कहा, "मेरी जवाबदेही केवल हाईकमान और संविधान के प्रति है, मैं किसी दबाव में काम नहीं करता।उन्होंने कहा कि अनुशासन समिति को हल्के में लेना किसी के लिए ठीक नहीं होगा। जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे।"
शिमला , 03 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! एफटीए के खिलाफ कुलदीप राठौर ने केंद्र पर साधा निशाना, अनुशासनहीन नेताओं को दी सख्त चेतावनी
एंकर : कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने एक साथ दो मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाते हुए राजनीति और संगठन के भीतर हलचल पैदा कर दी है। एक ओर उन्होंने एफटीए घेरा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस में 'अनुशासन का डंडा' चलाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।राठौर ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही अनुशासन समिति की बैठक बुलाई जाएगी। इसमें हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा होगी और अनुशासन तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
कुलदीप राठौर ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित FTA के तहत सेब पर आयात शुल्क (Import Duty) घटाने की मांग का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार बताया। राठौर ने कहा कि अमेरिका द्वारा शून्य टैरिफ की मांग भारतीय किसानों के लिए घातक है। सस्ता विदेशी सेब बाजार में आने से स्थानीय बागवानों की कमर टूट जाएगी।
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उन्होंने हिमाचल विधानसभा में पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से भी इसी तरह के प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। उन्होंने पंजाब द्वारा इस दिशा में की गई पहल की सराहना की। उन्होंने बागवानों के हितों की रक्षा के लिए 'किसान आयोग' के गठन की वकालत की और स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों में देश के अन्नदाता की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।
वहीं कुलदीप राठौर ने हिमाचल कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष के पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता बरतने वाले नेताओं और पदाधिकारियों को अंतिम चेतावनी दी है।उन्होंने कहा कि कोई भी विधायक या बड़ा नेता संगठन के कार्यों में अनावश्यक दखल नहीं देगा।
पार्टी मंच के बाहर सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत राय रखना या पार्टी विरोधी बयानबाजी करना अब भारी पड़ेगा। राठौर ने दो टूक कहा, "मेरी जवाबदेही केवल हाईकमान और संविधान के प्रति है, मैं किसी दबाव में काम नहीं करता।उन्होंने कहा कि अनुशासन समिति को हल्के में लेना किसी के लिए ठीक नहीं होगा। जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, उसे परिणाम भुगतने होंगे।"
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