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शिमला , 03 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! शिमला स्थित प्रोडक्शन हाउस शौर्यगेट प्रोडक्शन द्वारा हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर अपने नवीन नाट्य प्रस्तुति “रंगामा” का मंचन किया जा रहा है। यह एक जीवंत हास्य नाटक है, जो रंगमंच कलाकारों के संघर्ष, सपनों और महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।शौर्यगेट प्रोडक्शन, जिसने वर्ष 2004 में हिमाचल प्रदेश की पहली हिंदी फीचर फिल्म का निर्माण किया था, कला और संस्कृति से जुड़ी कहानियों को प्रस्तुत करने की अपनी परंपरा को इस नाटक के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है। “रंगामा” एक मनोरंजक एवं सारगर्भित प्रस्तुति है, जो कलाकारों के जीवन, प्रेम और जुनून को दर्शाती है। नाटक का मुख्य पात्र शारुल एक समर्पित रंगकर्मी है, जो अपने गुरु की पुत्री पारुल से विवाह करना चाहता है। गुरु उसके सामने एक चुनौती रखते हैं कि केवल वही व्यक्ति पारुल से विवाह कर सकता है, जो स्वयं को उनसे श्रेष्ठ सिद्ध करे। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए शारुल अपने मित्रों—राजा, आनंद, बिन्नी और सलीम—की सहायता से एक योजना बनाता है, जिसे “रंगामा” कहा जाता है। इसके बाद हास्य, घटनाओं और भावनात्मक पलों से भरपूर घटनाक्रम दर्शकों को बांधे रखता है।यह नाटक केवल एक हास्य प्रस्तुति नहीं है, बल्कि रंगमंच की दुनिया में कलाकारों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण का प्रतिबिंब भी है। यह प्रस्तुति दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ प्रेरणा भी प्रदान करती है।
शिमला , 03 अप्रैल [ विशाल सूद ] ! शिमला स्थित प्रोडक्शन हाउस शौर्यगेट प्रोडक्शन द्वारा हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर अपने नवीन नाट्य प्रस्तुति “रंगामा” का मंचन किया जा रहा है। यह एक जीवंत हास्य नाटक है, जो रंगमंच कलाकारों के संघर्ष, सपनों और महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।शौर्यगेट प्रोडक्शन, जिसने वर्ष 2004 में हिमाचल प्रदेश की पहली हिंदी फीचर फिल्म का निर्माण किया था, कला और संस्कृति से जुड़ी कहानियों को प्रस्तुत करने की अपनी परंपरा को इस नाटक के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।
“रंगामा” एक मनोरंजक एवं सारगर्भित प्रस्तुति है, जो कलाकारों के जीवन, प्रेम और जुनून को दर्शाती है। नाटक का मुख्य पात्र शारुल एक समर्पित रंगकर्मी है, जो अपने गुरु की पुत्री पारुल से विवाह करना चाहता है। गुरु उसके सामने एक चुनौती रखते हैं कि केवल वही व्यक्ति पारुल से विवाह कर सकता है, जो स्वयं को उनसे श्रेष्ठ सिद्ध करे।
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इस चुनौती को स्वीकार करते हुए शारुल अपने मित्रों—राजा, आनंद, बिन्नी और सलीम—की सहायता से एक योजना बनाता है, जिसे “रंगामा” कहा जाता है। इसके बाद हास्य, घटनाओं और भावनात्मक पलों से भरपूर घटनाक्रम दर्शकों को बांधे रखता है।
यह नाटक केवल एक हास्य प्रस्तुति नहीं है, बल्कि रंगमंच की दुनिया में कलाकारों की मेहनत, संघर्ष और समर्पण का प्रतिबिंब भी है। यह प्रस्तुति दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ प्रेरणा भी प्रदान करती है।
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