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शिमला , 03 अप्रैल [ विशाल सूद ] ; डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने 2 अप्रैल को सदन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री से पूछा कि 77 प्राथमिकता वाले रेलवे खंडों में अनुशांसित 705 शमन संरचनाओं को पूरा करने का वर्षवार कार्यक्रम क्या है ? क्या सरकार चिन्हित 14 राज्यों में निर्माण की प्रगति और मृत्यु दर के बारे में जनता को वास्तविक समय पर जानकारी देने के लिए एक राष्ट्रीय हाथी रेल सुरक्षा डैशबोर्ड स्थापित करने की योजना बना रही है ? और यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं कि 22 प्रस्तावित ओवरपास और 72 पुलों में किए जाने वाले संशोधन जैविक निरंतरता बनाए रखे, ताकि हाथियों के झुंड इन संरचनाओं को नजरअंदाज करने के बजाए वास्तव में इनका उपयोग करे ? कीर्तवर्धन सिंह, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने रेल मंत्रालय और राज्य वन विभागों की सहायता से भारत में संवेदनशील रेलवे खंडों पर हाथी और अन्य वन्यजीवों के रेल से टकराने की दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सुझाए गए उपाय शीर्षक की एक व्यापक रिपोर्ट संकलित की है। इस रिपोर्ट के अनुसार हाथी रेलगाड़ी के बीच टक्कर की घटनाओं को कम करने के लिए अभिजात किए गए 77 प्राथमिकता प्राप्त रेलवे खंडो में कुल 705 शमन संरचनाओं की सिफारिश की गई है और रिपोर्ट आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्य सरकारों को भेज दी है। उन्होनें कहा कि प्रस्तावित संरचनाएं उन क्षेत्रों में स्थित है जहां अतीत में हाथियों की आवाजाही और मृत्यु दर दर्ज की गई है जो यह दर्शाता है कि ये स्थान स्थापित हाथी पर्यवासों या मार्गों का हिस्सा है। का्रसिंग संरचनाओं को विशेषरूप से हाथियों जैसी बड़ी शरीर वाली, झुंड में रहने वाली प्रजातियों को शामिल करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा संरचनात्मक डिजाइन में मोटे और मजबूत खंभे शामिल हैं, जिनसे संरचना के नीचे खुली आवाजाही की जगह बनी रहती है और सामाजिक झुंड में रहने वाले जानवरों के लिए सुरक्षित मार्ग की सुविधा रहती है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि रेल मंत्रालय से प्राप्त सूचना के आधार पर डिस्ट्रीब्यूटेड एकोस्टिक सेंसिग का उपयोग करके रेलवे टैªक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए कृत्रिम मेधा सक्षम इंट्रजन डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया गया है। इस सिस्टम के घटकों में आॅप्टिकल फाइबर, हार्डवेयर और हाथियों के संचालन के पूर्व स्थापित संकेत शामिल है। उन्होनें कहा कि रेलवे ट्रैक पर हाथियों का पता लगाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटेड एकाॅस्टिक सेंसिग का उपयोग करके एआई सक्षम इंट्रजन डिटेक्शन सिस्टम को भारतीय रेलवे के 141 रूट किलोमीटर खंड में लागू किया गया है और 981 आरकेएम खंड के लिए निविदाएं दी गई हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने आगे कहा कि अन्य उपायों में चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर गति प्रतिबंध लागू करना, भूमिगत पथ और रैंप का निर्माण, रेलवे ट्रैक के साथ-साथ बाड़ लगाना और लोको पायलटों को पूर्व चेतावनी देने के लिए अभिज्ञात हाथी मार्गोें पर संकेतक बोर्ड लगाना शामिल है।
शिमला , 03 अप्रैल [ विशाल सूद ] ; डाॅ. सिकंदर कुमार, राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री भाजपा ने 2 अप्रैल को सदन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री से पूछा कि 77 प्राथमिकता वाले रेलवे खंडों में अनुशांसित 705 शमन संरचनाओं को पूरा करने का वर्षवार कार्यक्रम क्या है ? क्या सरकार चिन्हित 14 राज्यों में निर्माण की प्रगति और मृत्यु दर के बारे में जनता को वास्तविक समय पर जानकारी देने के लिए एक राष्ट्रीय हाथी रेल सुरक्षा डैशबोर्ड स्थापित करने की योजना बना रही है ?
और यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं कि 22 प्रस्तावित ओवरपास और 72 पुलों में किए जाने वाले संशोधन जैविक निरंतरता बनाए रखे, ताकि हाथियों के झुंड इन संरचनाओं को नजरअंदाज करने के बजाए वास्तव में इनका उपयोग करे ?
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कीर्तवर्धन सिंह, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री ने बताया कि मंत्रालय ने रेल मंत्रालय और राज्य वन विभागों की सहायता से भारत में संवेदनशील रेलवे खंडों पर हाथी और अन्य वन्यजीवों के रेल से टकराने की दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सुझाए गए उपाय शीर्षक की एक व्यापक रिपोर्ट संकलित की है। इस रिपोर्ट के अनुसार हाथी रेलगाड़ी के बीच टक्कर की घटनाओं को कम करने के लिए अभिजात किए गए 77 प्राथमिकता प्राप्त रेलवे खंडो में कुल 705 शमन संरचनाओं की सिफारिश की गई है और रिपोर्ट आवश्यक कार्यवाही हेतु राज्य सरकारों को भेज दी है।
उन्होनें कहा कि प्रस्तावित संरचनाएं उन क्षेत्रों में स्थित है जहां अतीत में हाथियों की आवाजाही और मृत्यु दर दर्ज की गई है जो यह दर्शाता है कि ये स्थान स्थापित हाथी पर्यवासों या मार्गों का हिस्सा है। का्रसिंग संरचनाओं को विशेषरूप से हाथियों जैसी बड़ी शरीर वाली, झुंड में रहने वाली प्रजातियों को शामिल करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा संरचनात्मक डिजाइन में मोटे और मजबूत खंभे शामिल हैं, जिनसे संरचना के नीचे खुली आवाजाही की जगह बनी रहती है और सामाजिक झुंड में रहने वाले जानवरों के लिए सुरक्षित मार्ग की सुविधा रहती है।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि रेल मंत्रालय से प्राप्त सूचना के आधार पर डिस्ट्रीब्यूटेड एकोस्टिक सेंसिग का उपयोग करके रेलवे टैªक पर हाथियों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए कृत्रिम मेधा सक्षम इंट्रजन डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया गया है। इस सिस्टम के घटकों में आॅप्टिकल फाइबर, हार्डवेयर और हाथियों के संचालन के पूर्व स्थापित संकेत शामिल है। उन्होनें कहा कि रेलवे ट्रैक पर हाथियों का पता लगाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटेड एकाॅस्टिक सेंसिग का उपयोग करके एआई सक्षम इंट्रजन डिटेक्शन सिस्टम को भारतीय रेलवे के 141 रूट किलोमीटर खंड में लागू किया गया है और 981 आरकेएम खंड के लिए निविदाएं दी गई हैं।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने आगे कहा कि अन्य उपायों में चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर गति प्रतिबंध लागू करना, भूमिगत पथ और रैंप का निर्माण, रेलवे ट्रैक के साथ-साथ बाड़ लगाना और लोको पायलटों को पूर्व चेतावनी देने के लिए अभिज्ञात हाथी मार्गोें पर संकेतक बोर्ड लगाना शामिल है।
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